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हर स्कूल में लड़कियों को सैनेटरी पैड मिले नियम का उल्लंघन करने पर स्कूल की मान्यता रद्द होगी

Jan 30, 2026 Khulasa Online Reporter 715 व्यूज़
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हर स्कूल में लड़कियों को सैनेटरी पैड मिले नियम का उल्लंघन करने पर स्कूल की मान्यता रद्द होगी


हर स्कूल में लड़कियों को सैनेटरी पैड मिले नियम का उल्लंघन करने पर स्कूल की मान्यता रद्द होगी
नई दिल्ली।  सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को देश के सभी प्राइवेट और सरकारी स्कूलों को निर्देश दिया कि हर स्कूल में लड़कियों को फ्री में सैनेटरी पैड बांटना अनिवार्य होगा। लडक़े और लड़कियों के लिए अलग-अलग वॉशरूम बनाने होंगे। जो स्कूल ऐसा नहीं कर पाएंगे उनकी मान्यता रद्द की जाएगी।
इसके साथ ही कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि हर स्कूल में दिव्यांग-अनुकूल (डिसेबल-फ्रेंडली) टॉयलेट बनाए जाएं।
जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने क्लास 6 से 12 तक की छात्राओं के लिए सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में केंद्र सरकार की मेंस्ट्रुअल हाइजिन पॉलिसी (मासिक धर्म स्वच्छता नीति) को पूरे भारत में लागू करने पर यह आदेश सुनाया।
अगर स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग टॉयलेट नहीं हैं तो यह संविधान के अनुच्छेद 14 (बराबरी का अधिकार) का उल्लंघन है। अगर लड़कियों को सैनिटरी पैड नहीं मिलते। तो वे लडक़ों की तरह बराबरी से पढ़ाई और गतिविधियों में हिस्सा नहीं ले पातीं।
मासिक धर्म के दौरान सम्मानजनक सुविधा मिलना संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और गरिमा का अधिकार) का हिस्सा है। अगर लड़कियों को उचित सुविधा नहीं मिलती तो उनकी गरिमा और निजता प्रभावित होती है।

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