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राज्यपाल ने गहलोत राज के 9 बिल लौटाए, ऑनर किलिंग-मॉब लिंचिंग के खिलाफ बिलों को वापस भेजा

Jan 28, 2026 Khulasa Online Reporter 341 व्यूज़
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राज्यपाल ने गहलोत राज के 9 बिल लौटाए, ऑनर किलिंग-मॉब लिंचिंग के खिलाफ बिलों को वापस भेजा

राज्यपाल ने गहलोत राज के 9 बिल लौटाए, ऑनर किलिंग-मॉब लिंचिंग के खिलाफ बिलों को वापस भेजा

जयपुर । राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान पारित हुए 9 विधेयक (बिल) अलग-अलग कारणों से विधानसभा को लौटा दिए। राज्यपाल ने इन बिलों के कानूनी पहलुओं पर सवाल उठाते हुए वापस भेजा है। ये बिल साल 2019 से लेकर 2023 में पारित करवाए गए थे। वहीं, वसुंधरा राजे के पहले कार्यकाल के दौरान साल 2008 में पारित एक बिल भी लौटाया है।

पिछली गहलोत सरकार के दौरान साल 2019 में ऑनर किलिंग और मॉब लिंचिंग के खिलाफ पारित दोनों बिल फिर से विचार करने के लिए लौटाए हैं। ऑनर किलिंग पर उम्रकैद और पांच लाख जुर्माने का प्रावधान था। मॉब लिंचिंग पर भी कड़ी सजा का प्रावधान किया गया था।

इन दोनों बिलों के कई प्रावधान पहले आईपीसी में थे। राज्यपाल ने इन बिल के प्रावधान केंद्रीय कानूनों से टकराने के कारण लौटाए हैं। गहलोत राज में पारित दो प्राइवेट यूनिवर्सिटी के बिल के प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए लौटाया है।

वसुंधरा राजे सरकार में पारित राजस्थान धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2008 को सरकार पहले ही वापस लेने का फैसला कर चुकी है। इसकी जगह धर्मांतरण विरोधी कानून लाया जा चुका है।

तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के जवाब में गहलोत सरकार लाई थी बिल
केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ कांग्रेस ने देशभर में अभियान चलाया था। उस समय गहलोत सरकार केंद्रीय कृषि कानूनों की काट के तौर पर 2 नवंबर 2020 को कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) (राजस्थान संशोधन) विधेयक-2020 और कृषक (सशक्तीकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार (राजस्थान संशोधन) विधेयक लेकर आई थी। 2 नवंबर 2020 को दोनों बिल पारित हुए थे।

बाद में केंद्र सरकार ने कृषि कानून वापस ले लिए थे। केंद्रीय कानून के जवाब में राज्य के कानूनों की वैधानिकता पर उस समय भी सवाल उठे थे। केंद्र के कानून वापस लेने के बाद इन दोनों बिल का कोई औचित्य नहीं रह गया था। राज्यपाल ने दोनों बिल के कानूनी आधार और औचित्य नहीं होने का तर्क देते हुए वापस भेजा है।

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