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इसरो ने चंद्रयान-4 के लिए लैंडिंग साइट तलाशी, यहाँ विक्रम की होगी शानदार लैंडिंग

Feb 09, 2026 Khulasa Online Reporter 249 व्यूज़
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इसरो ने चंद्रयान-4 के लिए लैंडिंग साइट तलाशी, यहाँ विक्रम की होगी शानदार लैंडिंग

इसरो ने चंद्रयान-4 के लिए लैंडिंग साइट तलाशी, यहाँ विक्रम की होगी शानदार लैंडिंग

खुलासा ऑनलाइन। इसरो ने चंद्रयान-4 मिशन के लिए चंद्रमा के साउथ पोल के पास संभावित लैंडिंग साइट तलाश ली है। चंद्रयान-2 ऑर्बिटर से मिली हाई-रेजोल्यूशन तस्वीरों के आधार पर वैज्ञानिकों ने मॉन्स माउटन (MM-4) क्षेत्र को लैंडिंग के लिए सबसे उपयुक्त बताया है। हालांकि, लैंडिंग साइट पर अंतिम फैसला लॉन्च के नजदीक लिया जाएगा। मॉन्स माउटन साउथ पोल के पास स्थित करीब 6,000 मीटर ऊंचा पहाड़ है। इसकी चोटी काफी हद तक सपाट बताई गई है, जो सुरक्षित लैंडिंग के अनुकूल मानी जा रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह क्षेत्र इसलिए भी अहम है क्योंकि यहां लंबे समय तक सूर्य की रोशनी मिलती है और वॉटर आइस की मौजूदगी की संभावना भी जताई जाती है।

चंद्रयान-2 की तस्वीरों से मिली बड़ी मदद
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस अध्ययन को लूनर एंड प्लैनेटरी साइंस कॉन्फ्रेंस में प्रस्तुत किया गया। लैंडिंग साइट तय करने के लिए चंद्रयान-2 ऑर्बिटर पर लगे ऑर्बिटर हाई रेजोल्यूशन कैमरा (OHRC) की तस्वीरों का उपयोग किया गया। यह कैमरा चंद्र सतह को करीब 32 सेमी प्रति पिक्सल के रेजोल्यूशन में दिखाता है, जिससे छोटे क्रेटर, पत्थर, ढलान और सतह की बनावट स्पष्ट नजर आती है और जोखिम वाले इलाकों की पहचान पहले ही हो जाती है।

MM-4 साइट को क्यों चुना गया?

मॉन्स माउटन क्षेत्र की चार संभावित साइट्स में MM-4 सबसे सुरक्षित पाई गई। औसत ढलान करीब 5 डिग्री है, जबकि लैंडर 10 डिग्री तक के ढलान पर उतर सकता है। बड़े पत्थर कम हैं; अधिकांश बोल्डर 0.3 मीटर से छोटे पाए गए। यहां लगातार 11–12 दिन सूर्य की रोशनी मिलने की संभावना है। पृथ्वी के साथ रेडियो कम्युनिकेशन साफ बना रहता है, जिससे मिशन के दौरान संपर्क में दिक्कत नहीं आती।

सैंपल लेकर लौटेगा चंद्रयान-4
करीब 2104 करोड़ रुपये के इस मिशन में चंद्रमा की चट्टानों और मिट्टी के सैंपल पृथ्वी पर वापस लाए जाएंगे। मिशन में दो रॉकेट इस्तेमाल होंगे—LVM-3 (हेवी-लिफ्टर) और इसरो का भरोसेमंद PSLV। स्टैक-1: सतह पर सैंपल कलेक्शन के लिए डिसेंडर मॉड्यूल और सैंपल लेकर उड़ान भरने के लिए एसेंडर मॉड्यूल। स्टैक-2: थ्रस्ट के लिए प्रोपल्शन मॉड्यूल, सैंपल रखने के लिए ट्रांसफर मॉड्यूल और पृथ्वी पर लाने के लिए री-एंट्री मॉड्यूल। चंद्रयान-4 को इसरो का अब तक का सबसे चुनौतीपूर्ण मून मिशन माना जा रहा है।

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