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बीकानेर: ऑपरेशन के लिए अब मरीज को बेहोश करने की जरूरत नहीं, पढ़ें ये खबर

Feb 16, 2026 Khulasa Online Reporter 1120 व्यूज़
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बीकानेर: ऑपरेशन के लिए अब मरीज को बेहोश करने की जरूरत नहीं, पढ़ें ये खबर

बीकानेर: ऑपरेशन के लिए अब मरीज को बेहोश करने की जरूरत नहीं, पढ़ें ये खबर 

बीकानेर। पीबीएम अस्पताल में अब ऑपरेशन की पद्धति और भी आसान एवं दर्द रहित होने लगी है। मरीज को पूरा बेहोश करने की जरूरत खत्म हो गई है। केवल नर्व्स को सुन्न करके ऑपरेशन किया जा सकता है। इससे दर्द भी नहीं होता। पीबीएम के निश्चेतन विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय “सोनोग्राफी गाइडेड रीजनल नर्व ब्लॉक” विषय कार्यशाला में दिल्ली एम्स से आए डॉक्टर्स ने निश्चेतन विभाग के डॉक्टरों को सोनोग्राफी से नर्व खोजकर उसमें इंजेक्शन लगाने के गुर सिखाए। निश्चेतन विभागाध्यक्ष एवं कोर्स डायरेक्टर डॉ. कांता भाटी ने बताया कि सोनोग्राफी गाइडेड रीजनल नर्व ब्लॉक आधुनिक निश्चेतन एवं दर्द प्रबंधन की एक अत्याधुनिक तकनीक है, जिससे सर्जरी के दौरान तथा बाद में रोगियों को बेहतर दर्द नियंत्रण प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि इस तकनीक में सोनोग्राफी की सहायता से विशिष्ट नसों को लक्षित कर लोकल एनेस्थेटिक दवा नर्व के आसपास दी जाती है, जिससे दर्द संकेतों का मस्तिष्क तक पहुंचना अवरुद्ध हो जाता है और संबंधित अंग सुन्न हो जाता है। इस तकनीक से जटिलताओं का जोखिम कम होता है तथा रोगी की रिकवरी शीघ्र होती है।

अल्ट्रासाउंड की मदद से नसों, रक्त वाहिकाओं और सुई को स्पष्ट देखा जा सकता है, जिससे आकस्मिक पंक्चर या जटिलताओं का खतरा कम हो जाता है। सुई को इन-प्लेन (लंबी धुरी) या आउट-ऑफ-प्लेन (अनुप्रस्थ) दृष्टिकोण का उपयोग करके डाला जाता है, जिससे चिकित्सक सुई की नोक को बेहतर देख सकें। इसका उपयोग शल्य चिकित्सा से पहले, दौरान या बाद में दर्द से राहत पाने के लिए, विशेष रूप से अंगों की सर्जरी, पुरानी दर्द की स्थिति और ऑर्थोपेडिक मामलों में किया जाता है। यह प्रक्रिया ओपिओइड (दर्द निवारक दवाओं) के सेवन को कम कर सकती है, तेजी से रिकवरी में मदद करती है, और अस्पताल में रहने की अवधि को घटाती है। इसमें डॉक्टर अल्ट्रासाउंड प्रोब (ट्रांसड्यूसर) का उपयोग करके प्रभावित तंत्रिका क्षेत्र की पहचान करते हैं और इमेज के आधार पर ही सटीक स्थान पर स्थानीय एनेस्थेटिक इंजेक्ट करते हैं।

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