सोमवार, 20 जुलाई 2026
Header Ad 1
Breaking
‘द केरल स्टोरी 2’ के मेकर्स को झटका, रिलीज से एक दिन पहले हाईकोर्ट ने लगाई रोक; इतने दिन के लिए टली फिल्म रक्षा, एफटीए, यूपीआई से एआई तक : पीएम मोदी-नेतन्याहू के बीच वार्ता में किन मुद्दों पर सहमति बनी; क्या समझौते हुए? जोधपुर में भारतीय सेना ने अंतरराष्ट्रीय रक्षा पत्रकारों का स्वागत किया ईडी ने अंबानी का 17 मंजिला घर किया जब्त, इसकी कीमत 3716 करोड़; 40 हजार करोड़ के फ्रॉड मामले में जांच जारी 9 साल बाद इजराइल पहुंचे पीएम मोदी, इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने पत्नी के साथ एयरपोर्ट पर किया रिसीव, दोनों देशों के बीच ये डील संभव ‘द केरल स्टोरी 2’ के मेकर्स को झटका, रिलीज से एक दिन पहले हाईकोर्ट ने लगाई रोक; इतने दिन के लिए टली फिल्म रक्षा, एफटीए, यूपीआई से एआई तक : पीएम मोदी-नेतन्याहू के बीच वार्ता में किन मुद्दों पर सहमति बनी; क्या समझौते हुए? जोधपुर में भारतीय सेना ने अंतरराष्ट्रीय रक्षा पत्रकारों का स्वागत किया ईडी ने अंबानी का 17 मंजिला घर किया जब्त, इसकी कीमत 3716 करोड़; 40 हजार करोड़ के फ्रॉड मामले में जांच जारी 9 साल बाद इजराइल पहुंचे पीएम मोदी, इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने पत्नी के साथ एयरपोर्ट पर किया रिसीव, दोनों देशों के बीच ये डील संभव

क्या है लोकसभा स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया : विपक्ष ला सकता है अविश्वास प्रस्ताव

Feb 09, 2026 Khulasa Online Reporter 745 व्यूज़
शेयर:
क्या है लोकसभा स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया : विपक्ष ला सकता है अविश्वास प्रस्ताव

क्या है लोकसभा स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया : विपक्ष ला सकता है अविश्वास प्रस्ताव

लोकसभा में बजट सत्र की शुरुआत से लेकर अब तक सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध की स्थिति बनी हुई है। खासकर विपक्ष के नेता राहुल गांधी की तरफ से भारत के पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब से जुड़े संदर्भ पेश करने की मांग के बाद से। 

इस मामले में विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को भी घेरा है, जिन्होंने राहुल को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव से इतर किसी किताब या रिपोर्ट पर बोलने की इजाजत नहीं दी। अब सामने आया है कि लोकसभा स्पीकर के खिलाफ विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। न्यूज एजेंसी एएनआई के सूत्रों के मुताबिक, विपक्षी सांसदों का आरोप है कि लोकसभा स्पीकर सदन में पक्षपात करते हैं और कुछ सदस्यों को बोलने की मंजूरी नहीं देते।
 
विपक्षी दलों का आरोप है कि उन्हें बहस के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया जाता और उनके नोटिसों को चुनिंदा तरीके से स्वीकार किया जाता है। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल के अनुसार, जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी बोलने के लिए खड़े होते हैं, तो अक्सर उनका माइक बंद कर दिया जाता है।

विपक्ष ने स्पीकर के उस बयान पर आपत्ति जताई है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि महिला सांसद प्रधानमंत्री पर हमले की योजना बना रही थीं। विपक्ष ने इस आरोप को निराधार बताते हुए स्पीकर से इस पर स्पष्टीकरण और सबूत की मांग की है।

क्या लोकसभा अध्यक्ष को हटाया जा सकता है, आखिर कैसे?
भारतीय संविधान में लोकसभा स्पीकर (अध्यक्ष) को हटाने की प्रक्रिया है। इसे तकनीकी रूप से 'महाभियोग' नहीं कहा जाता। संविधान में स्पीकर को हटाने का जिक्र अनुच्छेद 94(सी) के तहत दिया गया है। इसमें कहा गया है कि स्पीकर को लोकसभा के प्रस्ताव के जरिए हटाया जा सकता है।
क्या है लोकसभा स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया?
14 दिनों का नोटिस: स्पीकर को हटाने के लिए लिखित नोटिस दिया जाना जरूरी है। वह भी कम से कम प्रक्रिया शुरू करने से 14 दिन पहले। इसी के साथ ऐसे किसी भी प्रस्ताव के लिए कम से कम 50 सांसदों का समर्थन जरूरी है।

सदन की अध्यक्षता: जब स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर सदन में चर्चा या बहस हो रही होती है, तब स्पीकर सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकते। इस दौरान डिप्टी स्पीकर या राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त कोई अन्य सदस्य सदन की कार्यवाही का संचालन करता है।
मतदान की प्रक्रिया: स्पीकर को हटाने के लिए सदन के तत्कालीन सभी सदस्यों के बहुमत की जरूरत होती है। सीधे शब्दों में यह सामान्य अविश्वास प्रस्ताव से अलग है, क्योंकि इसमें केवल सदन में मौजूद और मतदान करने वाले सदस्यों का बहुमत पर्याप्त नहीं होता। सभी सदस्यों की मौजूदगी और उनका मतदान करना जरूरी होता है।

इसे एक उदाहरण से समझें, अगर सदन की कुल सदस्य संख्या 543 है, तो स्पीकर को हटाने के लिए कम से कम 272 वोटों की जरूरत होगी, चाहे सदन में कितने भी सदस्य गैरमौजूद हों या मतदान में हिस्सा न ले रहे हों।

प्रस्ताव पारित होने का असर: अगर लोकसभा में यह प्रस्ताव बहुमत से पारित हो जाता है, तो स्पीकर को तत्काल प्रभाव से पद छोड़ना पड़ता है। इसके साथ ही सदन को नए अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू करनी होती है।
चूंकि लोकसभा स्पीकर मुख्यतः उसी दल की तरफ से चुना जाता है, जो सत्ता में होता है, ऐसे में अगर स्पीकर को हटाने के लिए जरूरी वोट मिल जाते हैं तो यह सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के तौर पर देखा जाता है। इसका मतलब है कि सत्तापक्ष लोकसभा में बहुमत खो चुका है और उसके पास सरकार में रहने के लिए जरूरी 272 सदस्यों का समर्थन नहीं है। ऐसे में विपक्ष मौके पर सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी ला सकता है।

Article Ad 2
Khulasa Online Reporter

लेखक

Khulasa Online Reporter

this is descriptions

1,104 प्रकाशित खबरें

रिपोर्टर प्रोफ़ाइल
शेयर करें:
Footer Ad 1

संबंधित ख़बरें