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राजस्थान में स्वास्थ्य विभाग की टीमों के हेल्थ केयर सेंटर्स पर रैंडम सर्वे में हुए चौकाने वाले खुलासे, पढ़े पूरी खबर ...

Feb 14, 2026 Khulasa Online Reporter 332 व्यूज़
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राजस्थान में स्वास्थ्य विभाग की टीमों के हेल्थ केयर सेंटर्स पर रैंडम सर्वे में हुए चौकाने वाले खुलासे, पढ़े पूरी खबर ...

राजस्थान में स्वास्थ्य विभाग की टीमों के हेल्थ केयर सेंटर्स पर रैंडम सर्वे में हुए चौकाने वाले खुलासे, पढ़े पूरी खबर ...

जयपुर। राजस्थान में निचले स्तर पर बने हेल्थ इंस्टीट्यूशन में स्थिति विकट है। इन सेंटर्स पर न तो पर्याप्त फेकल्टी है और न ही पर्याप्त मात्रा में दवाईयां। हाल ही में हेल्थ डिपार्टमेंट की टीमों ने इन सेंटर्स का रैंडम सर्वे किया तो इसमें चौकाने वाला खुलासा हुआ। इन सेंटर्स में से 64 फीसदी पर तो एम्बुलेंस ही नहीं है। वहीं स्वच्छता के मामले में भी 9 फीसदी की स्थिति खराब मिली है।

इन पर किया सर्वे

यह सर्वे जोनल ज्वाइंट डायरेक्टर, सीएमएचओ, डिप्टी सीएमएचओ, पीएमओ, ब्लॉक सीएमएचओ और मेडिकल ऑफिसर इंचार्ज (MOIC) समेत 500 से ज्यादा सदस्यों की टीम ने किया। जांच के दायरे में 321 सब सेंटर (SC), 161 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), 56 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), 1 सैटेलाइट हॉस्पिटल, 17 उप-जिला हॉस्पिटल (SDH) और 3 जिला हॉस्पिटल (DH) शामिल थे।

मेडिकल हेल्थ डिपार्टमेंट के सूत्रों के मुताबिक 560 सेंटर्स पर ये रैंडम सर्वे करवाया। इसमें से जब टीम के सदस्यों ने 239 सेंटरों पर सर्वे करके एम्बुलेंस की उपलब्धता जानी तो पता चला केवल 36 फीसदी (85 सेंटर्स) पर ही एम्बुलेंस हैं। जबकि 154 सेंटर पर एम्बुलेंस ही नहीं है। इस स्थिति में अगर कोई गंभीर मरीज यहां प्राथमिक उपचार के लिए आता है तो उसे रैफर करने की सुविधा तक नहीं है।

भले ही सरकार प्रदेश के हर हाइवे के रेस्ट एरिया में एम्बुलेंस तैनात करने की घोषणा कर रही हो, लेकिन पहले सरकार को इन सेंटरों की स्थिति में भी सुधार करने की जरूरत है।

जहां एंबुलेंस मिली वहां 4 फीसदी काम की नहीं

जिन 85 सेंटर पर टीमों को एंबुलेंस मिली उनमें से 4 फीसदी यानी 3 तो काम की ही नहीं थी। उनमें मरीज को लाना या ले-जाने की सुविधा नहीं है। केवल 82 ही एंबुलेंस ही उस स्थिति में मिली जिसे मरीजों की सुविधा के लिए उपयोग किया जा सकता है।

2 फीसदी संस्थान समय पर नहीं खुले मिले

सर्वे टीम ने 560 केंद्रों की सुबह 9 बजे जांच की, तो 2 प्रतिशत केंद्र बंद पड़े मिले। न डॉक्टर, न पैरामेडिकल स्टाफ, कुछ भी नहीं। वहीं इन सभी संस्थाओं में इलाज और अन्य सुविधाओं का आंकलन किया तो एक फीसदी यानी 7 संस्थाओं में स्थिति बहुत घटिया मिली। न मौके पर दवाईयां थी और न ही अन्य सुविधा। 123 इंस्टीट्शन ऐसे मिले, जिनमें सुविधाओं का स्तर संतोषजनक था।

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